शिक्षक : विश्व के सबसे आदर्श मानव जीवन
गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।। महान कवि कबीरदास द्वारा रचित इस काव्य का अर्थ है कि यदि आपके सामने गुरु और गोविंद दोनों खड़े हो तो आप सर्वप्रथम किनके पैर छुएँगे ? सबसे पहले गुरु के पैर छूना उत्तम होगा। क्योंकि वे गुरु ही हैं जिन्होंने हमें गोविंद रूप का दर्शन करवाया। वे गुरु ही हैं जिन्होंने यह बताया कि ये ईश्वर हैं। हम अपने बोलचाल कि भाषा में ‘गुरु’ और ‘शिक्षक’ शब्द का प्रयोग हमेशा से करते आए हैं। परंतु कुछ ही ऐसे हैं जो इन शब्दों के वास्तविक अर्थ को समझ पाए हैं। इन दोनों शब्दों (‘गुरु’ और ‘शिक्षक’) का अर्थ एक ही है : जो हमें शिक्षा देते हो। जरूरी नहीं कि विद्यालय में जो पुस्तक की ज्ञान को विस्तृत और सरल रूप से बताते हैं वो ही गुरु हैं। ‘गुरु’ शब्द का श्रेय उन सभी लोगों को जाता है जो हमें कुछ अच्छा सीखते हैं, जो हमें अच्छी शिक्षा देते हैं। हमारे माता पिता ही हमारे सर्वप्रथम शिक्षक हैं। हमारे माता पिता ही हैं जिन्होंने हमें जीना सिखाया। हमारे देश भारत में सदियों से ही शिक्षकों के सम्मान में ‘गुरु पूर्णिमा’ मनाया जा रहा है एव...